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अनकही बातें
वो अखंड अभिशाप था, हां वो मेरा पाप था ! ना कोई पराकाष्ठा, ना कोई आधार था ! युं तो मैं अभिमानवश, हर पाप से अनजान था ! जब खुली ये नींद...

CLAT Mentor Neeraj Sir
Jul 11, 2023


यु तो तु भोली बहुत है
यु तो तु भोली बहुत है, खुद में ही खोई बहुत है ! लोग शायद समझे बुराई, पर दिल से तु प्यारी बहुत हैं ! तेरी सादगी को जिसने भी जाना, उसके लिए तु न्यारी बहुत है ! तु कहां समझा भी पायी, तेरी अधर्मों से दुरी बहुत है ! जिसने देखा, अपना समझा, तेरी अपनी एक छवि है ! जो ना तु लोगों के जैसी, कहा सबने तु बुरी बहुत है ! प्रतिस्पर्धा के दौर में, सबसे पीछे क्यु तु पड़ी है ! जो ने तुने खुल्के बोला, सोचा सबने खाई पड़ी है ! तेरे हर एक चुप्पी को, हर पल यहां रगड़ा है सबने ! शांत जो बैठी है तु, अब

CLAT Mentor Neeraj Sir
Sep 9, 2019
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