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कुंभकर्ण: कर्तव्य, वीरता और बलिदान (Kumbhkarna Poem)
कुंभकर्ण को अक्सर केवल रावण के विशालकाय भ्राता और अपनी लंबी नींद के लिए याद किया जाता है, लेकिन उसके व्यक्तित्व में वीरता, कर्तव्य, निष्ठा और बलिदान का एक अलग ही पक्ष दिखाई देता है। यह कविता कुंभकर्ण के उसी रूप को सामने लाने का प्रयास है—एक ऐसे योद्धा की कहानी, जो सत्य को जानता था, अपने भ्राता के अधर्म को समझता था, फिर भी अपने कर्तव्य और निष्ठा के लिए रणभूमि में उतर गया।

CLAT Mentor Neeraj Sir
Oct 15, 2022
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