कर्ण केवल महाभारत का महान धनुर्धर नहीं था, बल्कि त्याग, दान, संघर्ष और नियति का सबसे मार्मिक प्रतीक भी था। यह कविता कर्ण के जीवन, उसकी पीड़ा, उसकी निष्ठा, उसके अभिमान और उसके अंतिम संघर्ष को भावपूर्ण शब्दों में प्रस्तुत करती है। महाभारत के इस अमर योद्धा को समर्पित यह रचना उसके व्यक्तित्व के उन पहलुओं को सामने लाती है, जिन्हें इतिहास आज भी याद करता है।