रावण: महाबली वीर (Ravana: Mahabali Veer)
Updated: Aug 7

Mahabali Ravana Poem by Neeraj Kumar
महाबली मैं वीर हूँ, सामर्थ्य हूँ, बलवान हूँ!
रावण मेरा नाम है, ज्ञानियों में मान हूँ!
कहे लोग अभिमान जिसको, मेरे वीरता का नाम है!
जा, पर्वतों से पूछ लो, भुजाओं का बल मेरा!
राक्षसों का राज हूँ मैं, विध्वंस का आगाज़ हूँ मैं!
होंगे वो साक्षात भगवान, पर उनसे भी नाराज़ हूँ मैं!
मारने को जिसके लिए, ब्रह्मा का षड्यंत्र हुआ!
जिसके लिए नारायण ने भी, नर वेश को धारा है!
तू बता, ये जन-जनाधि, कौन किससे हारा है?
महाबली मैं वीर हूँ, सामर्थ्य हूँ, बलवान हूँ!
रावण मेरा नाम है, ज्ञानियों में मान हूँ!
मुझको तो ये सब कुछ पता था, वैकुंठ धाम में जो योजन बना था!
मारने मुझको यहाँ, नारायण को धर पे जना था!
मैं तो उसी दिन जीत गया, जिस दिन कौशल्या ने राम को जना था!
सीता को पाकर, वनवास जाकर, भगवान सबकुछ भोग रहे!
मुक्ति के आसार में, मैं श्रीराम को ही ढूँढ़ रहा था!
त्रिलोक विजय जो मेरा नाम है, कर्म से मुझे मिला है!
स्वयं ब्रह्मा जानते थे, मेरे कर्म को भी मानते थे!
वो तो मेरा सौभाग्य है, राक्षस वंश का कल्याण है!
नर-वानर वेश में, देवताओं का आभार है!
मैं भला वो कौन हूँ, जो सिया को हर सका था,
कर अधर्म वो मान का, मेरे तरफ़ से भगवान को सहयोग था!
श्रीराम भी तो भगवान हैं, सौ चाल वो भी चल रहे हैं,
बस एक चाल जो मैंने चली, क्या वो पाप का प्रमाण था?
एक-एक कर जो हर दिन, देवताओं के हाथों मर रहे हैं!
सौभाग्य मेरा है ये सबकुछ, सबका मुक्ति का प्रमाण है!
सज्ज है ये रावण आज, रणभूमि में जाने को!
कुछ खेल और पराक्रम दिखाकर, स्वर्ग को भी जाने को!
श्रीराम तो भगवान हैं, पराजय विपरीत नाम है!
पर खड़ा वो घायल मानव, मेरे वीरता का प्रमाण है!
महाबली मैं वीर हूँ, सामर्थ्य हूँ, बलवान हूँ!
रावण मेरा नाम है, ज्ञानियों में मान हूँ!



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